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महिलाओं में टीबी के लक्षण यहां दिए गए हैं: खांसी जो दो सप्ताह से अधिक समय तक रहती है और कफ या खून पैदा करती है, वह महिलाओं में टीबी का एक विशिष्ट लक्षण है। थकान: बिना किसी स्पष्ट कारण के, थकान या कमजोरी महसूस करना एक संकेत हो सकता है कि महिला को टीबी है। बुखार: टीबी से पीड़ित महिलाओं में, निम्न-श्रेणी का बुखार जो कुछ हफ्तों तक रहता है, इसका संकेत हो सकता है। अत्यधिक पसीना आना, विशेष रूप से रात में, महिलाओं में टीबी का एक सामान्य लक्षण है। भूख कम लगना: टीबी से पीड़ित महिलाओं में…

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1. बकरी के दूध में लौंग घिसकर आंखों में आंजने से रतौंधी में राहत मिलती है। 2. जीरे के चूर्ण को घी और शक्कर के साथ खायें। 3. पके टमाटर का रस सुबह शाम पियें। 4. भैंस के कान का मेल आंख में लगायें। 5. सिंधव और साकार मिक्स करके रात को आंख में आंजना चाहिए। 6. रोज त्रिफला धृत और त्रिफलाचूर्ण का सेवन करें। 7. समुद्री झाग तथा बालू चीनी मिक्स करके आंख में आंजना चाहिए। 8. गाय के गोबर के रस में पिपर घिसकर आंख में आंजना चाहिए। FAQ Que1 : रतौंधी का सबसे अच्छा इलाज क्या है?…

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शराब का नशा 1. खजूर को पानी में भिगो के मसलकर वो पानी पी ले। 2. ककड़ी खिलाए या प्याज का रस पिलाए। 3. पानी में घुली थोड़ी सी फिटकरी पिलाए। 4. गुड़ का पानी पिलाए। 5. पानी में नमक मिलाकर पिलाए। भांग का नशा 1. इमली का खट्टा पानी पियें। 2. जमरुख (अमरूद) खिलाना चाहिए। 3. छाश पी सकते है। 4. सिंधव और सुंठ नींबू के रस में मिलाकर चाटना चाहिए।

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1. राई और नमक मिलाकर गर्म पानी के साथ पिलाना चाहिए। 2. नमक या गाजर का रस पिलाना चाहिए। 3. तुलसी का रस पिलाना चाहिए। 4. उमरा की छाल के रस में घी मिलाकर गरम करके पीने से वचनाग और सोमल का विष उतर जाता है। 5. उल्टी करके विष उतार सकते है।

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1. सफेद मूसली के चूर्ण को गाय के दही के साथ 15 दिन तक लें। 2. विदारीकंद, गोखरू, मूसली, आंवला, सिंधव, पीपर का चूर्ण, चीनी को दूध के साथ लेना। 3. अफीम, जायफल, जावंतरी, कपूर, नागरवेल के पत्तों के रस को वाटकर एक गोली लें उसको खाए। 4. गला, गोखर, आंवला, धी, साकर के साथ मथ लें और ऊपर से दूध पी लें। 5. गोखरू, दूध में उबालकर चीनी पिएं। 6. दूध में सलाममिश्री, काली मूसली, सफेद मूसली, बल्बिज, गोखरू और खारेक का चूर्ण लें। 7. शुद्ध बंगभस्म को शहद में मिलाकर लेना चाहिए। 8. इसबगुल को रात में भिगोकर…

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1. गाल पर हल्का रेचक दें। 2. सुदर्शनचरण चूर्ण लेना। 3. कच्चे आम की छाल को पानी में घिसकर लेप करें। 4. लीपन के पोड़े में नमक डाल कर पानी के साथ गर्म करके लेप बना लें। 5. ग्लिसरीन का पेस्ट लगाएं। 6. गर्म पानी का शेक कीजिए। उससे गाल पचोलिया 3-4 दिन में अपने आप बैठ जाता है। संक्रमक रोग है।

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1 नागरवेल के पत्ते का रस आंख में डाले। 2. नींबू का रस, शहद और फिटकरी मिला के उसको आंख में डाले। 3. सफेद प्याज का रस और शहद मिलाकर आंख में डाले। 4. हल्दी, फिटकरी और इमली के पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और शेक करे। 5. साकार 10 ग्राम 30 ग्राम धनिया का काढ़ा बनाकर उससे छानकर 2-2 बूंद आंख में डालें। 6. चाय बनाने के बाद बची हुई कूचे को कपड़े में पुल्टिस बनाकर आंख पर बांध लें। 7. हरदे और शक्कर को मिलाकर आंख में अंजन करना चाहिए। 8. इमली, फिटकरी, रसवंती गुलाबजल में भिगोई…

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1. पानी में शहद मिलाकर गरारे करें। 2. ताजी छाश पियें। 3. बबूल या बुरदी की छाल के काढ़े से गरारे करे। 4. काले सूखे अंगूर को शहद में भिगो दें उसके बाद उसको मुंह में लगाए। 5. गाजर का रस पियें, अल्सर के लिए अच्छा है। 6. तिल के तेल में सिंघव डाल के गरारे करें। 7. कब्ज दूर करना। हल्का जुलाब लें। 8. चनोथी के पत्ते या जुई के पत्ते या बबूल के पत्ते मुंह में रखें। 9. काथा लगा के लार को गिरने देना। 10. त्रिफला भस्म को शहद में लेकर लेप करें। 11. फिटकरी के पानी…

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प्रकार 1 मुल्तानी मिट्टी कैसे लगाएं : अपने चेहरे को अच्छे से धोकर तौलिये से सूखाने के बाद एक प्लास्टिक या शीशे के कटोरी में मुल्तानी मिट्टी, टमाटर का रस, चंदन पाउडर और एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर को मिलाकर पेस्ट बना लें। अब यह पेस्ट को अपने चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाने के 15 मिनट तक या जब तक न सूखे, तब तक लगा रहने दें फिर भीगे तौलिये से इसे पोंछ लें और गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। एक चीज़ का खास ध्यान रहे कि यह पैक आंखों और मुंह के आसपास की नाजुक त्वचा…

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हमारे मन में कई बार ये सवाल आता है कि मुल्तानी मिट्टी क्या है? जैसे की 18 वीं शताब्दी में मुल्तान भारत का हिस्सा हुआ करता था। तब वहां के लोगों का परिचय इस मिट्टी के चमत्कारिक गुणों से हुआ। इसके बाद मुल्तान के घुमंतू कारोबारियों ने भारत के दूसरे हिस्सों में भी इसकी बिक्री शुरू कर दी। मुल्तानी मिट्टी एक बहुत ही लोकप्रिय प्राकृतिक त्वचा देखभाल उत्पाद है जो लगभग हर घर में देखा जा सकता है। मुल्तानी मिट्टी का मूल स्थान मुल्तान पाकिस्तान से है, इसलिए इसे मुल्तानी मिट्टी कहा जाता है और कई वर्षों से भारत में…

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